नामांकन अभी जारी,स्कूल मर्ज प्रक्रिया रोके विभाग
आवाज हिमाचल। हमीरपुर
सरकारी प्राथमिक और मिडल स्कूलों में 5 से कम नामांकन के आधार पर तालाबंदी होने वाली है। हालिया कैबिनेट निर्णय के बाद हिमाचल प्रदेश में बंद और मर्ज होने वाले 560 सरकारी स्कूल सितंबर से नजदीकी शिक्षण संस्थानों में शिफ्ट होंगे। इस प्रक्रिया में सरप्लस होने वाले 750 शिक्षकों को नए स्कूलों में नियुक्ति के बाद ही 560 स्कूलों के विद्यार्थी नजदीकी स्कूलों में शिफ्ट किए जाएंगे।शून्य नामांकन वाले 108 स्कूल बंद करने और पांच व पांच से कम विद्यार्थियों की संख्या वाले 452 स्कूल मर्ज करने का सरकार ने फैसला लिया है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने जिला उपनिदेशकों से 10 दिन में शिक्षकों को नई जगह नियुक्ति देने की सूची मांगी है।मगर विभागीय सूची में ऐसे भी स्कूल शामिल हैं जिनमें नामांकन बढ़ रहा है और एडमिशन होने के चलते बच्चों की संख्या 8 से अधिक हो चुकी है। प्री प्राईमरी विद्यार्थियों की संख्या मिलाएं तो यह आंकड़ा और अधिक हो रहा है। मिड डे मील और यू डाइज के नामांकन में पूरे प्राथमिक स्तर के बच्चे शामिल किए जाते हैं मगर स्कूल मर्ज या बंद करते समय इनका आंकड़ा भी देखना चाहिए। ऐसे में राजकीय टीजीटी कला संघ ने प्रदेश सरकार से अपील की है कि स्कूल मर्ज करने की प्रक्रिया फिलहाल सितंबर माह का नामांकन फाइनल होने के बाद पूरी की जाए ताकि केवल वही स्कूल मर्ज किए जाएं जिनका सकल नामांकन 5 से कम हो। संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कौशल और महासचिव विजय हीर ने कहा कि मर्ज किए जा रहे अधिकांश स्कूल ऐसी जगह हैं जहां से समीपी स्कूल 2 से 3 किलोमीटर पैदल दूरी पर है जिसे प्राथमिक स्तर के नौनिहालों को रोजाना तय करना जटिल है। इसके अलावा इन स्कूलों में मौजूद शिक्षकों को भी नामांकन बढ़ाने का एक अवसर मिलना ही चाहिए क्योंकि कुछ स्कूल बिना शिक्षक या सिंगल टीचर लंबे समय रहे जिसके चलते लोगों ने अपने बच्चे दाखिल नहीं करवाए या उनको अन्य स्कूलों में शिफ्ट किया। दिवंगत मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने एक बच्चे के लिए भी जापान की तर्ज पर स्कूल खुला रखने की घोषणा की थी और वर्तमान सरकार से भी अभिभावक आशा लगाए बैठे हैं कि इन स्कूलों को मर्ज करने की बजाय नामांकन बढ़ाने के अवसर मिलने चाहिए। संघ ने कहा कि 30 सितंबर 2024 का डाटा ही यू डाइज़ और युक्तिकरण हेतु फाइनल होता है और ऐसे में इस प्रक्रिया को फिलहाल होल्ड किया जाए । इसके साथ ही शिक्षा विभाग स्कूलों के नामांकन को फिर से जांचे अन्यथा ज्यादा नामांकन होने के बावजूद स्कूल बंद करने के खिलाफ अभिभावक उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं।





