April 16, 2026 1:24 AM

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दो सप्ताह से लगातार दहक रहे हमीरपुर जिला के जंगल

  • बिझड़ी रेंज के 60 प्रतिशत से ज्यादा जंगल जल कर राख़, करोड़ों की वन सम्पदा का नुकसान
  • आग से जंगलों को बचाने की विभागीय योजनाए फाइलों मे बंद, नहीं हुई अभी तक एक भी एफआईआर

आवाज हिमाचल। हमीरपुर
पिछले करीब 15 दिनों से हमीरपुर के जंगल एक-एक करके दहक रहे हैं। जंगलों में भड़की आग के कारण जहां वन विभाग को करोड़ों रूपये के नुक्सान का अनुमान है वही वन जीवों की कई प्रजातियां आग की लपटों के कारण खत्म होने की कगार पर हैं। हमीरपुर वन मंडल की 70 वीटों मे जगलों के दहकने का सिलसिला निरंतर जारी है लेकिन विभाग के पास मात्र दो दर्जन के करीब ही शिकायतें दर्ज हो पाई हैं। विभाग की मानें तो जंगलों में आग लगाने वाले अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी लेकिन गर्मी के इस सीजन मे हमीरपुर 60 प्रतिशत जंगल राख़ होने के बावजूद अभी तक एक भी शिकायत दर्ज नहीं हो पाई है। पिछले दो सप्ताह से बिझड़ी रेंज के जगलों में आग लगने के कारण तकरीबन 60 प्रतिशत जंगल राख़ में तबदील हुए हैं। इन आगजनी की घटनाओं मे अकेले बिझड़ी रेंज में ही लाखों रूपये का नुकसान हो चुका है और जंगलों मे अभी तक आग लगने का सिलसिला बरकरार है। आग से निपटने के विभाग के सारे फ़ार्मूले धरे के धरे ही नजर आ रहे हैं। लाखों रूपये खर्च कर जंगलों मे वन्य प्राणियों की प्यास बुझाने व जंगलों को आग से बचाने मे सहयोग होने के दावे करने वाले मानसरोवर भी विभाग के काम नहीं आ सके हैं। विभाग की मानें तो गर्मियां शुरू होने से पहले ही जगलों से चीड़ की पत्तियों को हटा लिया गया था लेकिन इस दावे की पोल बिझड़ी रेंज के वह तमाम जंगल ब्यान कर रहे जो पिछले कई दिनों से दहक रहे हैं। बिझड़ी के जंगलों मे चल रहा आग के तांडव से तापमान का पारा चढ़ गया है वहीं रोजाना लग रही आग के कारण समुचे बड़सर क्षेत्र धुआं व राख़ के गुब्बार मे बदल चुका है। आग के कारण जहां पर्यावरण व वातावरण दूषित हुआ है वहीं हवा में फैले धुएं व राख के गुब्बार के कारण दमा रोगियों के लिए सांस लेना मुश्किल हो गया है। दीगर यह भी है कि वनों मे आग लगने के कारण हर साल करोड़ों रूपये का नुकसान वन विभाग को तो हो ही रहा है लेकिन कितने ही वन्य जीव मौत का ग्रास बन रहे है इसका आंकड़ा किसी के पास नहीं है। विभाग गर्मियों से पहले बड़े बड़े वायदे व दावे ठोकता रहा है लेकिन जंगलों को आग से बचाने की सारी योजनाएं केवल फाइलों तक ही सीमित हैं। इन्हें धरातल मे उतारने पहले ही वन सम्पदा राख़ हो रही है। बिझड़ी वन रेंज के तहत आने वाले रैली, बुठान, कलवाल, चकमोह, चलैली, सुदर, पक्काभरों, रोपड़ी, करेर, सहित अन्य कई जंगल आग के कारण राख़ हो चुके है लेकिन विभाग अभी भी कम नुकसान होने की बात करते हुए अपनी जिम्मेदारी से बचता नजर आ रहा है। विभाग की लेटलतीफी व अनदेखी के कारण हमीरपुर में भी पंजाब जैसे हालात बन चुके हैं, लेकिन अभी भी विभाग केवल अपनी योजनाओं को धरातल पर नहीं उतार पाया है। इसका खामियाजा स्थानीय लोगों सहित सरकार को भुगतना पड़ रहा है।

 

बिझड़ी रेंज के कुछ जंगलों मे आग के कारण नुकसान हुआ है। वन कर्मियों की मुस्तैदी से बाड़ा व सुदर के जंगल को बचा लिया गया है। जंगलों में आग लगाने वाले अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। विभागीय टीमें अपने कार्य को अंजाम दे रही है।
विनोद राणा,
रेंज ऑफिसर बिझड़ी।

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