ब्रह्मलीन महंत शिव गिर जी महाराज ने धौलगिरी पर्वत पर जगाई थी विकास की अलख
आवाज हिमाचल। हमीरपुर
हिमाचल प्रदेश के धौलगिरी पर्वत पर विराजमान भगवान शिव के अंश अवतार कहलाने वाले वाल योगी सिद्ध बाबा बालक धाम दियोटसिद्ध में 19 फऱवरी को ब्रह्मलीन महंत शिवगिर जी महाराज की 20वीं बरसी के उपलक्षय पर विशाल चौकी व अटूट भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। महंत आवास पर आयोजित इस बरसी मेले मे गुरु परम्परा के अनुसार संत समाज की उपस्थिति में सुबह 10 बजे झंडा रस्म की अदायगी होगी, जिसके लिए विभिन्न मठों व मंदिरों के महंतों व सतों को आमंत्रित किया गया है। इसके साथ ही बाबा जी की चौकी चलेगी जिसमे सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक पंजाब व हिमाचल के प्रसिद्ध गायक भेंटों से बाल योगी का गुणगान करेंगे। मेले के दौरान देश विदेश सहित हिमाचल के लाखों श्रद्धालुओं के पंहुचने का अनुमान है। यहां पंहुचने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी सुविधा की कमी न रहे इसके लिए महंत प्रशासन की तरफ से विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। हर साल की भांति बरसी मेले में देश के साथ विदेशों में बैठे बाबा जी के अनन्य भक्त यहां पहुंच कर पुण्य अर्जित करते हैं।

7वीं शताब्दी में दियोटसिद्ध में स्थापित है सिद्ध गद्दी
प्राचीन सिद्ध व गोरख ग्रंथो से मिले उल्लेखों के मुताबिक बाल योगी बाबा बालक नाथ गुजरात के कठियाबाड से हिमाचल प्रदेश के शाहतलाई पंहुचे थे। जहां 12 सालों तक अपनी सिद्ध लीलाओं में मस्त रहने के बाद गुरु गोरखनाथ से हुई संघर्ष लीलाओं व माता रत्नों के ताने-मेहणों की लीला से आहात होकर दियोटसिद्ध पंहुचे जहां दियोट नामक राक्षस से गुफा को खाली करवा कर वास करने लगे। यह घटना 6-7वीं शताब्दी की मानी जाती है और उस समय धरती पर साईपा व लूईपा सभ्यताओं का प्रचलन था। उस अखंडकाल से लेकर अब तक 1400 सालों से अधिक समय से गुरु शिष्य की परम्परा मे यह प्राचीन सिद्ध गद्दी चली आ रही है जिस पर वर्तमान में 14वें महंत श्रीश्रीश्री 1008 राजेन्द्र गिर जी गद्दीनसीन हैं।
1400 साल पुराना है सिद्ध गद्दी का इतिहास
करीब 1400 सालों से चली आ रही प्राचीन सिद्ध गद्दी की प्राचीन परंपराओं की मान्यताओं में 600 सालों का कोई ठीक उल्लेख नहीं है लेकिन 900 सालों के इतिहास के कुर्सीनामे के मुताबिक करीब 900 साल पहले इस सिद्ध गद्दी को महंत दिलजीत गिर जी ने उसी जप तप साधना की विधि व सिद्धियों के साथ संभाला था जिस सिद्ध विधा से इस गद्दी पर 600 सालों तक तप व तपस्या का सिलसिला चला आ रहा था। जप, तप व साधना की विधि व सिद्धियों के साथ ब्रह्मालीन महंत शिव गिर जी महाराज ने 1974 में 13वें महंत के रूप में सिद्ध गद्दी को संभाला और 2004 तक महंत गद्दी पर नसीन रहते हुए उन्होंने दियोटसिद्ध मे न्यास का गठन करते हुए धार्मिक नगरी सहित क्षेत्र के विकास मे अपना अहम योगदान देते हुए बिजली, स्वस्थ्य, पानी, सड़क, लंगर, श्रद्धालुओं के ठहराव के लिए सराय सहित अन्य मुलभुत सुविधाओं को पूरा करने मे योगदान दिया। उन्होंने चकमोह मे महाविद्यालय, संस्कृत महाविद्यालय, स्कूल का निर्माण करवाकर उनका संचालन किया, स्वास्थ्य के क्षेत्र में चकमोह में 100 बिस्तरों के अस्पताल की नींव भी रखी। दियोटसिद्ध के विकास का सारा श्रेय ब्रह्मलीन महंत शिवगिर महाराज को ही जाता है, क्योंकि उन्होंने क्षेत्र की मूलभूत सुविधायों को लेकर जो प्रयास किए वह आज भी वहीं पर खड़े हैं।
महंतों के कुर्सीनामे के मुताबिक सिद्ध गद्दी की वंशावली
सिद्ध गद्दी की महंत वंशावली के दौरान 900 साल पहले महंत दिलजीत गिर हुए हैं। उनके बाद उनके शिष्य महंत रामचंद्र, महंत दलीप जी गिरी, महंत यकम गिरी, महंत दिलपत गिरी, महंत दौलत गिरी, महंत शिवचरण गिरी, महंत बलराम गिरी, महंत सिद्ध गिरी, महंत किरपाल गिरी, महंत रणजीत गिरी, महंत शक्ति गिरी, महंत शिव गिरी जी महाराज और वर्तमान में महंत राजेन्द्र गिर जी महाराज गुरु शिष्य व प्राचीन सिद्ध गद्दी की परम्परा का निर्वहन कर रहे हैं।
संत समाज की उपस्थिति में होगी झंडा रस्म
19 फरवरी को सुबह 10 बजे झंडा रस्म के साथ संत समाज की उपस्थिति में बरसी मेले का आयोजन किया जाएगा, जिसमे शाम 5 बजे तक चलने बाली बाबा जी की चौकी मे पंजाब के जालंधर से प्रसिद्ध गायक मुकेश इनायत, हरजीत सिंह, अनिल होशियारपुरी सहित हिमाचल के ऊना से अजय माही अपनी मधुर आवाज से श्रद्धालुओं को बाबा जी की भेटों से निहाल करेंगे। इस दौरान साउंड सेवा चौहान साउंड पंजाब की तरफ से रहेगी। मेले के दौरान श्रद्धालुओं की तमाम सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी और अटूट लंगर की व्यवस्था रहेगी।







