- गुरु शिष्य का संबध होता है सबसे उन्नत व पवित्र : महंतश्री
आवाज हिमाचल। हमीरपुर
गुरु और शिष्य का संबध सबसे उन्नत एवं पवित्र होता है। गुरु शिष्य का रिश्ता मित्रता की उच्चतम अभिव्यक्ति है क्योंकि यह नि:शर्त दिव्य प्रेम व बुद्धिमता पर आधारित होता है। इसी परम्परा को कायम रखते हुए विश्व विख्यात सिद्ध पीठ बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध के गद्दीसीन महंत श्रीश्रीश्री 1008 राजिंद्र गिरी जी महाराज ने अपने गुरुओं के प्रति निष्काम भावना का परिचय देते हुए उनके समाधि स्थलों का सौंदर्यकरण करवाया है। महंतश्री ने ब्रह्मालीन महंत गुरु गद्दी मठ समाधियों के सौंदर्यकरण को लेकर पिछले कुछ समय से काम चलाया हुआ था जो अब परिपूर्ण हो चुका है। मठ समाधियों के सौंदर्यकरण करवा कर अपने गुरुओं के प्रति दिव्य प्रेम को महंतश्री ने गुरु शिष्य के बीच के रिश्ते की परिभाषा को प्रभाषित किया है। महंत राजेन्द्र गिरी जी महाराज परम्परिक सिद्ध गद्दी के वर्तमान महंत है लेकिन महंत सिद्ध गद्दी की परम्परा उतनी ही पुरानी है जितनी की धौलगिरी पर्वत पर बाल योगी बाबा बालक नाथ के विराजमान होने की है। प्राचीन उलेखों के मुताबिक एवं सिद्ध गद्दी के इतिहास अनुसार दियोटसिद्ध मे गुरु गद्दी की परम्परा 1200 से 1500 साल पुरानी है। यह गुरु गद्दी की परम्परा पीढ़ी दर पीढ़ी नहीं बल्कि गुरु सिद्ध गद्दी के नियमों व शर्तो पर चलती आ रही है। महंतश्री गुरु गद्दी परम्परा को निभाते हुए हर साल ब्रह्मालीन महंतों के मठ समाधियों को संवारने का काम करते है और सेवार्थ भाव से उनके सौंदर्यकरण करवाते हैं। वर्तमान महंत को भी श्रद्धांलु बाल योगी का दूसरा रूप मानते है और गुरु पूर्णिमा के अवसर लाखों श्रद्धालु पौणाहारी के दरबार मे पवित्र गुफा के दर्शनों के बाद महंतश्री से आशीर्वाद लेते हैं। इस दौरान गुरु परम्परा के मुताबिक महंतश्री श्रद्धालुओं को नामदान दीक्षा की बख्शीश भी करते हैं। महंतश्री ने बताया कि महंत गद्दी का इतिहास हजारों साल पुराना है। अपने-अपने समय में जो भी गुरु जी गद्दी पर विराजमान रहे है उनका दियोटसिद्ध के उत्थान के लिए सबसे बड़ा योगदान रहा है। आज मंदिर न्यास के नाम से जीतने भी शिक्षण व धार्मिक संस्थान चलाये जा रहे हैं वह सब ब्रह्मालीन महंतों की देन हैं। गुरु गद्दी पर रहते हुए उनके गुरुओं ने क्षेत्र मे विकास के आयाम स्थापित किए जिन्हे संवारने व आगे बढ़ाने की परम्परा पर काम किया जा रहा है। महंत गुरु गद्दी मठ समाधियों का सौंदर्यकरण भी उन्हीं में से एक है। उन्होंने कहा कि गुरु शिष्य का रिश्ता आटूट है। गुरुओ के प्रति जो दिव्य प्रेम इंसान के दिल मे होता है वह हमेशा निशर्त होता है।





