February 5, 2026 5:35 AM

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पहली बैठक में SDM स्वाति डोगरा का संतुलन, लेकिन अफसरशाही बनी विवाद की जड़

भारत के बिख्यात सिद्ध तीर्थ बाबा बालक नाथ मंदिर ट्रस्ट की दूसरी सालाना बैठक इस बार काफी हंगामेदार रही। बैठक की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि पहली बार लगभग सभी ट्रस्टियों को खुलकर अपनी बात रखने का अवसर मिला। इसके साथ ही मंदिर के महंत, जो परंपरागत मंदिर प्रबंधन और प्राचीन सिद्ध विधाओं में दक्ष माने जाते हैं, बैठक की कार्यवाही से काफी हद तक संतुष्ट नजर आए।
बैठक में प्रशासन की ओर से कुल 22 एजेंडे प्रस्तुत किए गए, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इनमें से अधिकांश एजेंडे वेतन और भत्तों से जुड़े रहे। श्रद्धा से अर्जित ट्रस्ट की वास्तविक आय का उपयोग श्रद्धालुओं की सुविधाओं और समस्याओं के समाधान के लिए कैसे किया जाए, इस पर कोई ठोस एजेंडा शामिल नहीं किया गया।
सबसे अहम मुद्दा यह रहा कि भारी भीड़ और अफरा-तफरी के बीच श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगमता से गुफा तक पहुंचाने को लेकर बैठक में कोई गंभीर चर्चा नहीं हो सकी। यह विषय बैठक में लगभग नजरअंदाज होता दिखा।
हालांकि, कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर सदन में सहमति बनी। मंदिर ट्रस्ट की चेयरपर्सन एवं एसडीएम स्वाति डोगरा ने कर्मचारियों की परेशानियों को दूर करने का आश्वासन दिया। यह नवनियुक्त एसडीएम स्वाति डोगरा की पहली ट्रस्ट बैठक थी, जहां प्रशासन और सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति सीधे संवाद के रूप में दिखाई दी। एक कुशल प्रशासक के रूप में उन्होंने बैठक को संतुलित और जिम्मेदारी के साथ संपन्न कराया।
बैठक का सबसे विवादास्पद पहलू मंदिर कार्यालय और वहां तैनात अफसरशाही रही। लगभग सभी ट्रस्टियों ने मंदिर कार्यालय और अधिकारियों की कथित निरंकुश कार्यशैली पर सवाल उठाए। ट्रस्टियों का आरोप है कि अधिकारियों की मनमानी के चलते सरकार के प्रति आम लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।
तीखी बहस के बाद विशेष आमंत्रित सदस्यों का एक दल बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकल गया। बहिष्कार करने वाले सदस्यों का कहना था कि जब सरकार द्वारा मनोनीत सदस्यों के सुझावों को ही नजरअंदाज किया जाता है, तो बैठक में उनकी मौजूदगी का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
इन सदस्यों ने सरकार से मांग की है कि प्रदेश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले इस मंदिर में तुरंत एक स्थायी मंदिर अधिकारी की नियुक्ति की जाए। उनका साफ कहना है कि यदि वर्तमान में तैनात अधिकारी इसी तरह कार्य करते रहे, तो बाबा बालक नाथ मंदिर ट्रस्ट एक बार फिर लगातार विवादों में घिरा रहेगा।

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