- जूनियर कबड्डी प्रतियोगिता में सिल्वर मैडल लेकर लौटी बेटी पर बड़सर कर रहा मान
आवाज हिमाचल।हमीरपुर
उत्तराखंड जूनियर महिला कबड्डी प्रतियोगिता में प्रदेश की झोली में अपने बेहतर हुनर से सिल्वर मेडल डालने वाली रिश्ता चंदेल का बिझड़ी के अंबोटा मे भव्य स्वागत किया गया। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले की बिझड़ी पंचायत के अंबोटा गांव की बेटी रिश्ता चंदेल ने उत्तराखंड महिला कबड्डी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया। जूनियर नेशनल कबड्डी चैंपियनशिप में भाग लेने के बाद जब वह अपने घर लौटीं, तो गांववासियों ने उनका ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया।रिश्ता चंदेल के पिता डॉक्टर राजकुमार और उनके परिवार के लिए यह बेहद गर्व का क्षण था। पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई और लोग उनकी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे थे। धर्मशाला स्थित साईं हॉस्टल की छात्रा रिश्ता चंदेल इससे पहले भी कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुकी हैं। वह कई बार हिमाचल प्रदेश की टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और अपनी बेहतरीन खेल शैली के लिए जानी जाती हैं। जब रिश्ता अंबोटा गांव पहुंची, तो ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत किया। पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल था, और लोग ढोल-नगाड़ों की धुन पर झूमते नजर आए। पंचायत के प्रतिनिधियों, स्थानीय नेताओं और स्कूल के बच्चों ने भी इस खुशी के मौके पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। पंचायत प्रधान ने रिश्ता की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि उनकी यह सफलता क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।
मेहनत और समर्पण का नतीजा
रिश्ता चंदेल की इस सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण है। उनके कोच और परिवार के सदस्यों का कहना है कि वह बचपन से ही खेलों में रुचि रखती थीं और कबड्डी में उनका जुनून देखते ही बनता था। साईं हॉस्टल में रहकर उन्होंने कठिन प्रशिक्षण लिया और अपनी खेल प्रतिभा को निखारा।अपनी सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए रिश्ता ने कहा कि यह जीत सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि मेरे माता-पिता, कोच और पूरे हिमाचल की जीत है। मैं आने वाले समय में और भी कड़ी मेहनत करूंगी और देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने का सपना पूरा करूंगी।रिश्ता चंदेल अब अपनी अगली प्रतियोगिताओं की तैयारियों में जुट गई हैं। उनका लक्ष्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना और स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोशन करना है। उनकी इस सफलता से हिमाचल प्रदेश के अन्य युवा खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा और वे भी खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होंगे। रिश्ता की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि मेहनत, लगन और समर्पण से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।






