आवाज हिमाचल। भोरंज
उपमण्डल भोरंज कर तहत थाना गांव में भागवत कथा में कथावाचक आचार्य सुभाष शर्मा ने कहा कि बच्चों के मन में बैर विरोध नहीं होता, बैर विरोध बड़ों में होता है। उंन्होने कहा कि बालक की प्रथम गुरु उसकी माता होती है उसी दृष्टि से वह संसार को देखता व समझता है।इस मौके पर उंन्होने लोगों को राजा दक्ष प्रजापति की कहानी भी लोगों को सुनाई।उंन्होने बताया कि कथा की सार्थकता तब सिद्ध होती है जब इसे हम अपने जीवन, व्यवहार में धारण कर लें। निरंतर श्रीहरि स्मरण करते हुए अपने जीवन को आनंदमय व मंगलमय बनाकर आत्म कल्याण करें। अन्यथा यह कथा केवल मनोरंजन व कानों के रस तक ही सीमित रह जाएगी। भागवत कथा से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होते हैं और शांति व मुक्ति मिलती है। श्रीमद्भागवत कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का लौकिक व आध्यात्मिक विकास होता है। कलियुग में कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। इस मौके पर ध्यान सिंह, कुल पुरोहित सोमदत्त, गौतम, नरेंद्र कुमार व अन्य लोग मौजूद रहे।





