नकदी फसलों की बिक्री के लिए जाइका कम्पनी उपलब्ध करवाएगी डिजिटल प्लेटफार्म
आवाज हिमाचल। हमीरपुर
हिमाचल के किसानों को अपनी नकदी फसलों को बचने के लिए अब नहीं जूझना पड़ेगा। जापान इंटरनेशनल को-आपरेशन एजेंसी (जाइका) हिमाचल के किसानों को अपनी नकदी फसलों को बेचने के लिए डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से निश्चित बाजार उपलब्ध करवाएगा। हमीरपुर स्थित फ़सल विविधकारण परियोजना के तहत इसके लिए एक कार्ययोजना तैयार की गई है जिसे धरातल पर उतारने के लिए जाइका कम्पनी से स्वीकृति प्रदान की है। हिमाचल प्रदेश फसल विविधिकरण प्रोत्साहन परियोजना के निदेशक डॉ सुनील चौहान, कृषि निदेशक कुमुद सिंह, जापान के टोक्यो स्थित जाइका एक्सपर्ट्स आदि ने वर्चुअल बैठक में इसे राज्य में लांच भी कर दिया। इस डिजिटल एग्री मार्केटिंग प्लेटफार्म को धरातल पर उतारने का जिम्मा देहात नामक एक निजी कंपनी को दिया गया है। एक साल में इसकी सफलता के आधार पर एचपीसीडीपी से संबंधित और राज्य के आम किसानों के लिए इस डिजिटल ढांचे को विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार कदम बढ़ाएगी। परियोजना में हिमाचल सरकार के मीडिया सलाहकार राजेश्वर ठाकुर ने बताया कि वर्तमान में राज्य के लाखों किसानों के पास अपने यहां पैदा होने वाली तमाम किस्म की सब्जियों जैसे, टमाटर, ब्रोकली, गोभी, मटर, भिंडी, बैंगन, शिमला मिर्च और फलों में सेब, अमरूद अनार आदि को उचित बाजार नहीं मिल पाता है। राज्य सरकार के जिलों में स्थापित एपीएमसी मंडियों के बाजार में भी किसानों को एक निश्चित आय और क्रेता मिलने की सम्भावनाएं मजबूत नहीं रहती हैं। इससे किसान की चिंता अपने उत्पादों को लेकर इस अनिश्चितता के अलावा मध्यस्थों की बेतहाशा कमीशनखोरी के खेल के कारण भी हर सीजन में बढ़ती जाती है। कई बार फसल की तैयारी के वक़्त और बाजार में खरीदारी के समय में तालमेल नहीं बैठ पाने के कारण किसान घाटे का सौदा करने को मजबूर हो जाता है। हिमाचल में फसल विविधिकरण परियोजना भी अपने यहां लगभग 25 हजार किसानों की ओर से भविष्य में पैदा होने वाले उत्पादों को बाजार के समाधान के लिए भी इसी दिशा में काम करने को आगे बढऩा चाह रही है। इसी सिलसिले में जाइका इंडिया को एचपीसीडीपी के निदेशक डॉ सुनील चौहान ने राज्य के किसानों को डिजिटल मार्किट प्लेटफॉर्म विकसित करने के लिए आग्रह पत्र भेजा था। पूरे देश भर से जाइका ने किसानों के हितार्थ इसी तरह की योजनाएं बनाकर विभिन्न सरकारी मंचों से उन्हें जाइका को भेजने के लिए कहा था। हिमाचल से मार्केटिंग बोर्ड ने भी ऐसे प्रस्ताव भेजे थे लेकिन एचपीसीडीपी के ही इस प्रस्ताव को जाइका इंडिया ने स्वीकृति दी है।
इसके लिए जाइका ने कुल डेढ़ करोड़ रुपए मंजूर किये हैं जिसके तहत देहात नामक निजी कंपनी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहले पायलट टेस्टिंग के आधार पर सोलन और मंडी जिलों के किसानों के लिए नेटवर्क तैयार करेगी। इसमें अमजेन जैसे डिजिटल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म की तरह ही देहात दोनों जिलों के सब्जी व फल उत्पादक किसानों को प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर करेगी। साथ में देश भर क्रेताओं को भी यहीं पर पंजीकृत किया जाएगा।





