रिटेल दवाईयों की खरीद के ऑडिट के दिए निर्देश
प्रिंसिपल बोले बहरहाल मैं अन्य कामों में हूं व्यस्त
आवाज हिमाचल। हमीरपुर
हर दम सरकार की पैरवी में मुस्तैद व जन समस्याओं को प्राथमिकता पर हल करने को अपनी पहली ड्यूटी मानने वाले उपायुक्त हमीरपुर हेमराज बैरवा ने मेडिकल कॉलेज में मरीजों को दी जाने वाली सरकारी दवाईयों की रिटेल खरीद पर ऑडिट मांग लिया है। उपायुक्त की मानें तो जनता के हितों से खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान की कोताही या लापरवाही जिसका सरकार की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा हो कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और इसी गर्ज के चलते मेडिकल कॉलेज से हुई पिछली 6 महीनों में सरकारी दवाईयों की खरीद के ऑडिट के निर्देश दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि पिछले 6 महीनों से लगातार मरीजों को दी जाने वाली सरकारी दवाईयां मेडिकल कॉलेज प्रशासन रिटेल कीमतों पर खरीद रहा है। जिस पर मेडिकल कॉलेज की कारगुजारी सवालों के घेरे में है। जनता यह जानना चाहती है कि आखिर किन कारणों से पिछले 6 महीनों से मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सरकारी खरीद के टेंडर रोक रखे हैं। टेंडर न होने की सूरत में आर्टिफिशियल अभाव के चलते रिटेल शॉप से सरकारी दवाईयों की खरीद हो रही है। जिस पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन कोई भी पक्ष देने को राजी नहीं है। मेडिकल कॉलेज के सूत्र बताते हैं कि इस कारगुजारी का खुलासा होने के बाद बने भारी दबाव के बावजूद मेडिकल कॉलेज प्रशासन दवाईयों की खरीद के टेंडर को लेकर लापरवाह बना हुआ है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अब तीन हफ्तों से यह कह कर टेंडर पोर्टल पर अपलोड़ नहीं किया जा रहा है कि लाखों की पगार पाने वाले मेडिकल कॉलेज के हाकिमों के डिजिटल साईन नहीं बने हैं और जब तक डिजिटल साईन नहीं बन जाते तब तक दवाईयों की सरकारी खरीद का टेंडर पोर्टल पर अपलोड़ नहीं किया जा सकता है। जाहिर तौर पर साफ है कि सरकारी टेंडर को बहानेबाजी में पिछले 6 महीनों से लटकाती आ रही व्यवस्था ने अब डिजिटल साईन का बहाना लेकर एक बार फिर टेंडर को लटकाने का प्रयास किया है।
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क्या है करोड़ों की दवाईयों की रिटेल खरीद का असली मामला
गौरतलब है कि भारत सरकार के नेशनल हेल्थ मिशन के तहत करीब 2 करोड़ रुपए का बजट मरीजों को मुफ्त दी जाने वाली दवाईयों के लिए आता है। जिसे रोगी कल्याण समीति के माध्यम से खर्च करके मरीजों को सरकार लाभ देती है। लेकिन इसी बजट को कारोबार बनाकर चेहतों को निजी लाभ देने का जरिया बना डाला है। जिसके चलते लाखों की दवाईयों की रिटेल खरीद जारी है। सरकारी बजट को कारोबार बनाकर चेहतों को लाभ देने के इस खेल में मेडिकल कॉलेज में ऊपर से नीचे तक हाथ रंगने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
जिसको लेकर उपायुक्त हमीरपुर ने जनता की शिकायतों व समस्याओं को लेकर कड़ा संज्ञान लिया है ताकि सरकार की छवि पर करोड़ों के बजट का दुरुपयोग होने के कारण सरकार की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उपायुक्त ने दो टुक कहा है कि इसमें सरकार का कोई कहीं दोष परिलक्षित नहीं हुआ है। यह सीधे तौर पर सिस्टम की साजिशों के कारण सिस्टम की नाकामी दिख रही है।
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आरकेएस की बैठक के लिए 6 महीने बीत जाने के बावजूद भी मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सरकार से अभी तक नहीं मांगा है कोई समय सरकारी दवाईयों की रिटेल खरीद के लिए ढुलमुल रवैया अपनाए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अभी तक रोगी कल्याण समीति की बैठक के लिए भी सरकार से न कोई समय मांगा है और न ही कोई बैठक की अनुमति के लिए चिट्ठी लिखी है। जिससे स्पष्ट हो रहा है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन सरकारी दवाईयों की खरीद के लिए टेंडर ही नहीं करवाना चाहता है।
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मेडिकल कॉलेज में एशेंशियल ड्रग मौजूद हैं। टेंडर की प्रक्रिया में समय लग रहा है। हमारे पास और भी बहुत से काम हैं। जैसे कि मैं इन दिनों ऑनलाइन बैंगलोर के किसी अस्पातल की इंस्पेक्शन में व्यस्त हूं।
डॉ. रमेश भारती, प्रिंसिपल मेडिकल कॉलेज हमीरपुर।







