ट्रस्ट प्रशासन के मुखिया ने योजना पर काम किया शुरू
महंत श्री ने कहा – इस योजना को सिरे चढ़ाने के लिए सभी का सहयोग जरुरी
मंदिर ट्रस्ट कमीश्नर बोले – श्रद्धालुओं को सुखपूर्वक दर्शन करवाना प्राथमिकता
अब श्रद्धालुओं को घण्टों तक नहीं करना पड़ेगा अपनी बारी का इंतजार
आवाज हिमाचल। ब्यूरो हमीरपुर
सरकार की सरपरस्ती में 36 वर्षों से चल रहे उत्तरी भारत के विख्यात सिद्ध पीठ बाबा बालक नाथ ट्रस्ट में श्रद्धालुओं को सुख से माथा टेकने की व्यवस्था अगर सिस्टम नहीं कर सका है तो खोट निश्चित तौर पर सरकारी ढांचे में परिलक्षित हो रहा है। 16 जनवरी 1987 को सरकारी अधिग्रहण में आए इस मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों का इजाफा हुआ है। ट्रस्ट के बही खाते का हिसाब समझा जाए तो 1987 में इस मंदिर में 30 से 47 लाख रुपए का चढ़ावा होता था लेकिन अब यही चढ़ावा 30 करोड़ के आंकड़े को पार कर पाया है। जिस आस्था के दम पर नकद चढ़ावे का आंकड़ा 30 करोड़ सालाना को पार कर गया है, वही श्रद्धालु चाला सीजन के दौरान बाबा की पावन गुफा में शीश नवाने के लिए शरीर से शरीर को जोड़े 10 से 12 घण्टे अपनी बारी का इंतजार करते हैं। रास्ते के नाम पर बने जिस पिंजरेनुमा ढांचे में श्रद्धालुओं को खड़ा होना पड़ता है, वहां न तो पीने के पानी का इंतजाम होता है, न भीष्ण गर्मी में किसी पंखे का इंतजाम रहता है। जो कि ट्रस्ट की कारगुजारी को सवालों के कटघरे में खड़ा करता है। इस बदहाल व्यवस्था को लेकर सैकड़ों बार मामला उठा, चर्चाएं हुई, श्रद्धालु चीखे लेकिन सरकारी ढर्रे पर चल रही व्यवस्था टस से मस नहीं हुई। अब इस व्यवस्था की अव्यवस्था को बदलने के लिए मंदिर ट्रस्ट के मौजूदा कमीश्नर व डीसी हमीरपुर हेमराज बैरवा के प्रयासों के चलते उम्मीद की किरण जागी है। मंदिर कमीश्नर ने इस समस्या को समझते हुए इस चुनौती से पार पाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। उनका मानना है कि सर्व प्रथम तो देश और दुनिया में विख्यात इस सिद्ध पीठ में सुखपूर्वक गुफा के दर्शनों की व्यवस्था प्राथमिकता के आधार पर करनी है, इसके लिए ट्रस्ट खाका तैयार करने में लगा है। उन्होंने कहा कि इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए पारंपरिक व्यवस्था का ज्ञान रखने वाले दियोटसिद्ध मंदिर के महंत श्रीश्रीश्री1008 राजेंद्र गिर जी महाराज से भी चर्चा करके उनके विचार जाने हैं। उन्होंने कहा कि यह काम बेशक बड़ा व मुश्किल है लेकिन दृढ़ इच्छा शक्ति के आगे कुछ भी मुश्किल नहीं होता है। इसी को समझते हुए मंदिर ट्रस्ट प्रशासन ने इस योजना पर कार्य करना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि सबसे पहले तो बाबा जी की पावन गुफा के आसपास करीब 500 से हजार श्रद्धालुओं को सुविधापूर्वक बैठने की व्यवस्था करनी होगी, जबकि पावन गुफा में बाबा जी के दर्शन सुख व सुविधापूर्वक श्रद्धालुओं को माकूल समय मिलने के साथ इस व्यवस्था के लिए योजना बनाई जा रही है। जिसमें कुछ विकास कार्य एशियन डिव्लपमेंट बैंक की योजना के माध्यम से करीब 65 करोड़ की लागत से करवाए जाएंगे। जबकि ट्रस्ट भी इस योजना के लिए यथाशक्ति विकास का बजट मुहैया करवाएगा।
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मंदिर बाबा बालक नाथ की गुफा के दर्शन श्रद्धालु सुख व सुविधापूर्वक करें। इसके लिए मंदिर ट्रस्ट प्रशासन त्वरित प्रभाव से योजना बनाने में जुट चुका है।
हेमराज बैरवा, टेंपल ट्रस्ट कमीश्नर एवं डीसी हमीरपुर।
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ट्रस्ट प्रशासन का यह फैसला स्वागत के योग्य है। इस मामले पर ट्रस्ट प्रशासन से विस्तृत चर्चा हो चुकी है। जिसमें हमारा मंदिर ट्रस्ट को पूरा सहयोग मिलेगा। श्रद्धालुओं को सुविधा मुहैया करवाना मेरा व न्यास प्रशासन का प्रथम कत्र्तव्य है। मैंने पहले भी कहा है कि इस सिद्ध पीठ की मर्यादा के मुताबिक विकास हो। जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं श्रद्धालुओं को उपलब्ध हों। अयोध्या राम मंदिर व काशी विश्वनाथ की तर्ज पर इस सिद्ध पीठ का विकास हो यह मेरी सोच और सपना है।
महंत श्रीश्रीश्री1008 राजेंद्र गिर जी महाराज, दियोटसिद्ध।





