- अकादमियों के संचालन के लिए नहीं है कोई नियम, न ही है कोई रेगुलेटरी सिस्टम
- करोड़ों के इस कारोबार में सरकार को लग रहा है करोड़ों का चुना
- अधिकाश संचालक न भरते हैं जीएसटी और न ही इनकम टैक्स
- निजी शिक्षा के बढ़ते कारोबार से सरकारी शिक्षा सिस्टम संकट में
आवाज हिमाचल। हमीरपुर
शिक्षा के मुलभुत ढांचे को सुनियोजित साजिश के तहत बर्बाद करने में लगे प्राइवेट सेक्टर ने सरकारी शिक्षा के मूल मकसद को ही तबाह करने का कार्यक्रम जारी रखा है। कमोवेश समूचे प्रदेश में शिक्षा पर प्राइवेट सेक्टर का कब्जा तेजी से होता जा रहा है। प्रदेश में सैंकड़ों अकादमियां इस धंधे में लगी हुई है इसके अलावा सैंकड़ों ट्यूशन सेंटर भी सक्रिय हैं। हैरानी यह है कि किसी भी सरकार ने शिक्षा के इस बढ़ते व्यापार की ओर ध्यान नहीं दिया है जिसके चलते आम आदमी से शिक्षा की मूलभूत सुविधा दूर होती जा रही है। सरकारी स्कूलों में अब वही छात्र शिक्षा ले रहे है जो महंगे प्राइवेट स्कूलों या अकादमियों में शिक्षा नहीं ले सकते हैं। इन सैंकड़ों अकादमियों व ट्यूशन सेंटरों के लिए कोई भी एगुलेट्री सिस्टम सरकार में नहीं है जिसके चलते इनकी मनमानी खूब चल रही है। एक अनुमान के मुताबिक़ अकेले प्राइवेट शिक्षा क्षेत्र में हजारों करोड़ का कारोबार मनमर्जी से चला हुआ है। प्रदेश के सबसे शिक्षित जिला हमीरपुर में शहर व कस्बों को मिलाकर 60 से ज्यादा ट्यूशन सेंटर व् अकादमियां चली हुई है जिन पर सरकार का कोई अंकुश नही है। निरंकुशता के आलम में प्राइवेट शिक्षा संचालक मनमाने दाम छात्रों से वसूलते हैं जहां जिसका मन करता है वह तेजी से फल फूल रहे हैं। इस कारोबार को दुकान की तरह मनमर्जी से चला रहा है।
इन निजी शिक्षा अकादमियों में दो महीने के क्रेश कोर्स के लिए 15-20 हजार वसूले जाते है जबकि रेगुलर कोर्स के लिए 60 हजार से लेकर 1.50 लाख का मनमाना दाम लिया जाता है जिसमे अधिकांश संचालक सरकार को इनकम टैक्स के साथ साथ जीएसटी में भी सैंकड़ों करोड़ का चुना लगा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक अधिकांश शिक्षा के कारोबारियों ने यह धंधा मनमर्जी के मुताबिक चलाया है जिसमें 20 लाख से ज्यादा इनकम ही नहीं बताई जाती है ताकि इनकम टैक्स व जीएसटी को गोलमाल करके हजम किया जा सके। अधिकांश प्राईवेट स्कूलों का भी यही हाल है कि करोड़ों रूपये की फ़ीस लेने के बावजूद इनके वहीखातों में राजस्व इनकम 20 लाख से कम बताई जाती है इस कारोबार में ग्राहक बने छात्रों को फ़ीस के नाम पर सिर्फ एक कच्ची रसीद थमा दी जाती है, जिसमे जीएसटी व रजिस्ट्रेशन का कोई हवााला नही रहता है।
अकेले हमीरपुर की बात करें तो अधिकांश अकादमियों व ट्यूशन सेंटरों ने प्राथमिक रजिस्ट्रेशन जो शॉप एंड कमर्शियल एस्टेव्लिशमेंट एक्ट के तहत होती है तक नहीं करवाई है यहां तक कि स्थानीय निकायों एमसी कारपोरेशन में भी इस तरह के कारोबारियों में से अधिकांशों ने कोई रजिस्ट्रेशन नही करवाई है।
शिक्षा के कारोबार में लगे इन लोगों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी कोई मानक पूरे नहीं किये है यहां तक कि ऊंचे ऊंचे भवनों के टॉप फ्लोर पर बैठे इन शिक्षा के हाटों में फायर सेफ्टी सिस्टम तक भी मौजूद नहीं है इसमें अगर कोई अनहोनी होती है तो यहां शिक्षा लेने बाले बच्चों की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है और न ही इनके पास मानकों के मुताबिक मूलभूत ढांचा उपलब्ध है जहां जिसकों सुविधा लगती है वहां अकादमी व ट्यूशन सेंटर के नाम पर अपनी दुकान सजा लेता है, जिस पर किसी का कोई नियन्त्रण व अंकुश नही है। यह लापरवाही एक न एक दिन जहां सरकारी शिक्षा सिस्टम को तबाह करने का कारण बनेगी वहीं दूसरी ओर छात्रों की सुरक्षा को भी खतरे में डालेगी।





