आवाज हिमाचल। हमीरपुर
पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का मॉडल पूरे देश में कांग्रेस के लिए विनाशकारी साबित हो रहा है और इसका ताजा उदाहरण दिल्ली के चुनावों में कांग्रेस की करारी हार के रूप में देखने को मिला है, जहां जनता ने पार्टी को पूरी तरह से नकार दिया और कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई। उन्होंने जारी एक बयान में कहा कि देश की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और भाजपा की गारंटियों पर भरोसा करती है और यही वजह है कि एक के बाद एक राज्य में भाजपा को जनता दिल खोलकर समर्थन दे रही है और देश कांग्रेस मुक्त हो रहा है। राणा ने कहा कि कांग्रेस की फजीहत का सबसे बड़ा कारण यह है कि हिमाचल में सुक्खू सरकार ने झूठी गारंटियां देकर जनता से वादा खिलाफी की और प्रदेश की आर्थिक स्थिति को बदहाल कर दिया। उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार ने प्रदेश के संसाधनों को अपने चहेतों और मित्रों पर लुटाने का काम किया, जिससे जनता का भरोसा पूरी तरह से टूट गया है। इतना ही नहीं, नौकरियों में पारदर्शिता खत्म कर अपनों को पिछले दरवाजे से फायदा पहुंचाया जा रहा है। इन सब कारणों से पूरे देश में कांग्रेस की छवि धूमिल हो रही है। राजेंद्र राणा ने कहा कि जिस तरह दिल्ली विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को जनता ने पूरी तरह से नकार दिया, वह सीधा संकेत है कि हिमाचल की कांग्रेस सरकार के कामकाज से पार्टी की राष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के लोगों को अब सुक्खू मॉडल की असलियत समझ में आ रही है, और यही कारण है कि प्रदेश में कांग्रेस समाप्ति के कगार पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि हिमाचल ही नहीं, बल्कि देशभर में कांग्रेस लगातार कमजोर होती जा रही है। जहां-जहां चुनाव हो रहे हैं, कांग्रेस औंधे मुंह गिर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कांग्रेस जीरो पर क्लीन बोल्ड हो गई है और ऐसा ही आने वाले दिनों में हिमाचल में भी होने वाला है। क्योंकि जनता कांग्रेस का सुपड़ा साफ करने को तैयार बैठी है। उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार अपने ही फैसलों से घिरी हुई है। बेरोजगारी, वित्तीय कुप्रबंधन, और गारंटियों पर अमल न करने जैसी नीतियों से प्रदेश की जनता का कांग्रेस से पूरी तरह भरोसा उठ चुका है, जिसका असर अब राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि सुक्खू मॉडल की नाकामयाबी कांग्रेस के लिए राजनीतिक ताबूत की अंतिम कील साबित होगी और आने वाले चुनावों में जनता इसका जवाब जरूर देगी।





