इस्तीफे स्वीकार न होने की सूरत में नहीं हो सकते आजाद विधायकों के उपचुनाव
आजाद विधायकों की मानें तो इस्तीफों की जंग को लेकर करेंगे सुप्रीम कोर्ट का रुख
आवाज हिमाचल। हमीरपुर
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह जिला हमीरपुर में उपचुनाव पर अभी तक संशय बरकरार है क्योंकि अगर हमीरपुर विस के आजाद विधायक आशीष शर्मा का इस्तीफा स्वीकार नहीं होता है तो हमीरपुर का उपचुनाव लोकसभा के चुनाव के साथ नहीं हो सकता है। हमीरपुर उपचुनाव को लेकर बेशक जो भी हवाई बातें हो रही हों, लेकिन कानून विशेषज्ञों की मानें तो विधानसभा स्पीकर को यह इस्तीफा स्वीकार या अस्वीकार करने की शक्तियां निहित हैं। विधानसभा स्पीकार के लिए इस्तीफा स्वीकार करने की कोई टाइम लिमिट नहीं है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा रूल ऑफ बिजनेस जिसके अधीन विधानसभा के कार्यशैली चलती है को समझें तो रूल 282 के सबक्लॉज टू के मुताबिक विधानसभा स्पीकर को इस्तीफा स्वीकार करने के लिए कोई समयावधि निश्चित नहीं है। इस्तीफा स्वीकार करने के लिए रीजनेबल टाइम लेने का अधिकार विधानसभा स्पीकर के पास सुरक्षित है। जबकि 287 के सबक्लॉज थ्री के मुताबिक विधानसभा स्पीकर के पास किसी भी विधायक के इस्तीफे को एग्जामिन करने, उसकी एब्ल्युशेन करने व इस्तीफे की जैनयुनेेस का परिक्षण करने की शक्तियां सुरक्षित हैं। जिसके आधार पर विधानसभा स्पीकार किसी भी इस्तीफे को स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस सरकार के शासन के चलते हमीरपुर आजाद विधायक के साथ अन्य दो आजाद विधायकों का इस्तीफा लटक सकता है, इसकी पूरी-पूरी संभावना बनी हुई है। कानून विशेषज्ञों के मुताबिक अगर आजाद विधायकों के इस्तीफे स्वीकार भी होते हैं तो उसके लिए अभी लंबा समय लग सकता है। सरकार के भीतरी सूत्रों पर भरोसा किया जाए तो आजाद विधायकों के अगर इस्तीफे स्वीकार होते हैं तो यह सात या आठ मई तक हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो तब तक चुनाव का प्रोसेस शुरू हो चुका होगा, जिसके चलते यह उपचुनाव लटक सकते हैं व एक तरह से कानूनी पचड़े में उलझ सकते हैं। उधर, प्रदेश में इस्तीफों में उलझी आजाद विधायकों के उपचुनाव की जंग पर उनकी सुनें तो वह इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की शरण लेंगे।





