March 6, 2026 7:29 AM

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इंद्र के रुष्ट होने से बड़सर कांग्रेस में पैदा हो रहे हैं सूखे जैसे हालात

लोकसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस दिग्गज नेताओं के ब्यान तोड़ रहे कार्यकर्ताओं का मनोबल

बड़सर कांग्रेस में 2012 से पहले के जैसे बन रहे हालात, डैमेज कंट्रोल में जुटा संगठन

आवाज हिमाचल। हमीरपुर
हिमाचल में लोकसभा चुनावों से पहले ही कांग्रेस हार मानती नजर आ रही है। पार्टी के दिगज नेता यह कहकर लोकसभा चुनाव लडऩे से कन्नी काट रहे हैं कि पार्टी कार्यकताओं की अनदेखी हुई है जिसके चलते कार्यकर्ता चुनावों के लिए सक्रिय नहीं हैं। कांग्रेस नेताओं के ये ब्यान न तो लोकसभा चुनावों और न ही विस उपचुनावों के लिए सही साबित होने बाले है, इन नेताओं के ब्यान खुद बयां कर रहे है कि प्रदेश कांग्रेस के बीच जो सियासी दरार पड़ी है वह कम होने के बजाए और गहरी होती जा रही है। उधर, विस उप चुनावों के लिए भी कांगेस की स्थिति एक अनार सौ बीमार वाली ही दिख रही है। संगठन बागी विधायकों से हुए डेमेज कंट्रोल मे जुटी हुई है लेकिन उप चुनाव विस क्षेत्रों में अपनी डफली अपना राग का महौल चल रहा है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह जिला के बड़सर विस की बात करें तो इंद्रदत्त लखनपाल की बागावत के बाद उप चुनावों में नेता बनने की फिराक में तो हर कोई खड़ा हो रहा है, लेकिन पार्टी के साथ कोई खड़ा नहीं दिख रहा है। बड़सर में पिछले कुछ दिनों मे कांग्रेस पदाधिकारियों की दो बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन इन बैठकों मे लोकसभा व विस उपचुनावों पर तो मंत्रणा कम ही हुई है लेकिन बैठक में खुद को असली कांग्रसी व मुख्यमंत्री का हितैषी साबित करने पर जरूर जोर दिया गया। वैसे तो संगठन के नाम पर पर्दे के पीछे से राजनितिक रोटियां सेंकने वाले नेताओं की यह मंडली बड़सर में कांग्रेस को मजबूत बता रही है लेकिन सच्चाई ये है कि बड़सर मे 2012 से पहले की स्थिति बन चुकी है। 2012 में 35 हजार बीजेपी कैडर वाले विस मे इंद्रदत्त लखनपाल बिखरी कांग्रेस को एकजुट कर पहली बार विधानसभा पंहुचे थे,और उसके बाद वह लगातार तीन बार विधायक बने उस समय कांग्रेस के सूखे को खत्म करने के लिए इंद्र मेहरवान हुए थे लेकिन वर्तमान मे स्थिति अब वैसी नहीं रही है। प्रदेश व बड़सर में जो राजनीतिक माहौल बना है इसमें इस बार इंद्र कांग्रेस से रुष्ट है और एक बार फिर बड़सर कांग्रेस सूखे की मार झेलती दिख रही है। बड़सर में इंद्र की बगावत के बाद उनके विरोध मे खड़ा होने वाला कोई भी चेहरा खुलकर सामने तो नहीं आया लेकिन संगठन के नाम पर राजनितिक रोटियां सेंकने वाली मंडली टिकटर्थियों की लाइन मे सबसे आगे नजर आने लगी है। हालांकि बीजेपी में जाने के बाद इंद्र की राहें भी आसान नहीं है लेकिन इंद्र के राजनीतिक कौशल व ईमानदार छवि को कौन नहीं जानता व पहचानता है। इंद्रदत्त लखनपाल बीजेपी को ज्वाइन करते हैं तो इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि बड़सर कांग्रेस के कई बड़े चेहरे बीजेपी ज्वाइन करेंगे और यहीं चेहरे बड़सर कांग्रेस को हाशिये पर धक्केलने मे अहम भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन दूसरी तरफ सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस भी बड़सर में डेमेज कंट्रोल को लेकर जुटी हुई है, कांग्रेस पूर्व विधानसभा चुनावों में आजाद प्रत्याशी रहे बड़सर के एक नेता के लगातार संपर्क मे है, इस नेता को कांग्रेस मे लाने की कवायद जारी है। जानकारी यह भी है कि बड़सर कांग्रेस के बीच पड़ी दरार को कम करने के लिए कांग्रेस अपने चुनावी चिन्ह पर उप विस चुनावों मे उतार सकती है।

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