आधुनिक युग में धार्मिक नगरी को विकसित करने के लिए नए सिरे से योजनाएं बनाने की है जरूरत
आवाज हिमाचल। हमीरपुर
विश्व विख्यात सिद्ध पीठ बाबा बालक नाथ सरकारी अधिग्रहण के चार दशकों बाद भी मुलभुत सुविधाओं के लिए चीख रहा है। इन 37 सालों में युग बदला, श्रद्धालु बदला और चढ़ाबे में भारी भरकम इजाफा हुआ लेकिन खेदजनक धार्मिक सिद्धपीठ पुरातन ढांचे की सुविधाओं से आगे नहीं बढ़ पाया। हालात ये है कि श्रद्धा का असली जरिया श्रद्धालु व्यवस्था के आंतक से यहां रोज आहत व प्रताडि़त रहता है। श्रद्धालुओं से हर साल करोड़ों के चढ़ाबे के बाबजूद 10 फीसदी सुविधाएं भी नहीं मिल पाती है जिससे यहां शीश नवाने के लिए देश विदेश से पंहुचने वाला श्रद्धालु इस आधुनिक युग में भी खुद को ठगा महसूस करते हुए व्यवस्थाओं को कोस रहा है। यदि वर्तमान समय में सरकार व प्रशासन धार्मिक नगरी दियोटसिद्ध को विकसित करने के लिए नए सिरे से भविष्य को देखते हुए योजनाएं बनाए तो यह धार्मिक स्थल करोड़ों के राजस्व का साधन बन सकता है, लेकिन 16 जनवरी 1987 को सरकार मे अधिकृत धार्मिक स्थल राजनितिक द्वेष का शिकार होता आ रहा है। दियोटसिद्ध मे 13 मार्च से बाबा जी के चाला मेले शुरू होने वाले हैं जो आधिकारिक तौर पर वैसे तो 14 अप्रैल तक चलेंगे लेकिन वैसे यहां साल भर श्रद्धालुओं का आना जाना निरंतर रहता है। 37 साल पहले हजारों के चढ़ाबे की आमदनी से शुरू हुए इस सिद्ध पीठ मे वर्तमान चढ़ाबा 30 करोड़ से पार कर चुका है लेकिन आज भी श्रद्धालुओं को शीश नवाने के लिए घंटो लाइनों मे खड़े होने को मजबूर होना पड़ रहा है। देश-विदेश से यहां पंहुचने वाले बुजुर्ग व बीमार श्रद्धालुओं के लिए गुफा तक पंहुचने के लिए कोई अलग रास्ता तक नहीं है। हालांकि हाल ही में गुफा के रास्ते का जरूर चौडिय़ाकरण किया गया है लेकिन यहां तक पंहुचने के रास्ते की व्यवस्था पहले जैसी ही है। इस आधुनिक दौर मे अपनी गाडिय़ों मे धार्मिक नगरी पहुंचने बाले श्रद्धालुओं के लिए गाड़ी खड़ा करने की पर्याप्त व्यवस्था तक नहीं हो सकी है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने सत्ता में रहते पार्किंग का शिलान्यास किया था लेकिन करीब डेढ़ दशक बीतने के बाद भी पार्किंग का निर्माण नहीं हो सका है। वर्तमान समय मे श्रद्धालुओं की संख्या मे इजाफे को देखते हुए दियोटसिद्ध मे एक बड़ी पार्किंग की व्यवस्था अति जरूरी है और इसके लिए न्यास ने लोकनिर्माण विभाग के रेस्ट हॉउस के नजदीक भूमि भी चयनित की थी लेकिन भूमि चयन के बाद किसी प्रकार की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। हालांकि सरकार धार्मिक स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की हर मंच से बात कर रही है और यदि ऐसा होता है तो दियोटसिद्ध नगरी के विकसित होने से युवाओं को रोजगार तो मिलेगा ही साथ ही बड़सर की यथा स्थिति भी बदलेगी।





