नहीं रही विधायक इंद्रदत्त लखनपाल को दादू बुलाने वाली समताना की मासूम कशिश
अपने अन्तिम समय में भी दादू को फोन कर कह गई अपना ख्याल रखने को
आवाज हिमाचल। हमीरपुर
चली गई दादू की लाडली, हमेशा के लिए खामोश हो गई वो मासूम आवाज़ जो हमेशा अपने दादू से मीठी मीठी बाते करती थीं। गुम हो गए वो शब्द जो सुर बनकर दादू को मनाने के लिए निकलते थे। हम बात कर रहे है बड़सर विधानसभा के समताना कोई कशिश की जो दुनिया को अलविदा कह भगवान को प्यारी हो गई! वह बड़सर के विधायक इंद्रदत्त लखानपाल की सबसे प्यारी परी थी और विधायक को हमेशा दादू कह कर बुलाती थी, विधायक इंद्रदत्त लखनपाल व कशिश के बीच भले ही खून का रिश्ता नहीं था लेकिन विधायक लखनपाल व कशिश के बीच लगाव खून के रिश्ते से भी कहीं अधिक था। कशिश जिला हमीरपुर की बड़सर विधानसभा क्षेत्र के समताना पंचायत से संबंध रखती थी, कशिश को मानसिक बीमारी थी जिसके चलते इलाज के दौरान एक सप्ताह पहले हमीरपुर अस्पताल में अन्तिम सांस ली, लेकिन कशिश का दादू से लगाव तो देखिये कि अपने अन्तिम समय में भी विधायक लखनपाल (दादू) को फोन कर बताती है कि उसकी तबियत ठीक नहीं है पर, आप अपना अच्छे से ख्याल रखना लेकिन खुद का ख्याल न रख सकी और अपने परिवार व दादू को हमेशा के लिए छोड़ कर परमधाम को प्रस्थान कर गई। कशिश के पिता जगेश कुमार का पहले ही निधन हो चुका है। माता सुदेश उसी मासूम के सहारे जी रही थी लेकिन वह भी अब टूट गई हैं। कशिश की मौत का पता चलते ही विधायक इंद्रदत्त लखनपाल उसके घर पंहुचे तो उनकी आंखे भी नम थी और उस घर मे मातम पसरा था जो कभी कशिश की खिल खिलाहट से खिलता था, विधायक लखनपाल ज़ब भी कशिश से उसके घर मिलने जाते थे तो उसके लिए कुछ न कुछ लेकर जाते लेकिन इस बार उनके हाथ खाली थे और कशिश की मीठी मीठी बातें उनके कानों मे गूंज रही थीं। मासूम कशिश की ख़ामोशी से घर में पसरे मातम से उसकी माता सुदेश का भी रो-रोकर बुरा हाल है। उस मासूम आबाज के खामोश होने से जहां उसका परिवार सदमे में है वहीं बड़सर विधानसभा क्षेत्र में भी दु:ख की लहर छाई हुई है। विधायक लखनपाल सहित हर कोई उसकी बात कर रहा है और उसकी मासूमियत को याद कर आंखे नम करने को मजबूर हो रहा है। भगवान ऐसी महान आत्मा को अपने चरणों में स्थान दे जो अपनी मीठी बातों से लोगों के चेहरों पर मुस्कुराहट लाती थी।





