शिखर से सिफर हुए बीजेपी के गढ़ हमीरपुर में संगठन के सरदारों को रहेगी बड़ी चुनौती
2024 के चुनाव में खुद को करना होगा साबित
आवाज हिमाचल। हमीरपुर
2024 लोकसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्री सांसद अनुराग ठाकुर व पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के गृह जिला हमीरपुर में स्थापित की गई संगठन की फौज को भीतर और बाहर की चुनावी जंग में खुद को साबित करने की चुनौती होगी। हमीरपुर जो कभी बीजेपी का गढ़ माना जाता था। हमीरपुर बीजेपी का कार्यकर्ता पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यकाल में प्रदेश भर में आदर्श कार्यकर्ता रहा है। लेकिन बीच में बीजेपी जिला संगठन की बागडोर जिस नेता को सौंपी गई उसकी व्यक्तिगत बैर-विरोधी नीति ने जहां हमीरपुर में बीजेपी को शिखर से सिफर कर दिया वहीं पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए सम्मान और स्नेह को भी अपने व्यक्तिगत विरोध के लिए धराशाई कर डाला। बीजेपी के विशाल काडर के बावजूद अगर हमीरपुर में बीजेपी सिफर हुई है तो इसकी तमाम जिम्मेदारी व जवाबदेही उस नेता की है। जिसने पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल के स्नेह सम्मान को अपने व्यक्तिगत विरोध के लिए स्वाहा कर डाला। नेता की इस निजी जंग में सबसे ज्यादा नुकसान हमीरपुर का हुआ। नुकसान ही नहीं कई विधानसभा क्षेत्रों में तो देश और दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी तीसरे नंबर पर जा पहुंची है। अब इन सब स्थितियों का मंथन कर बीजेपी ने हमीरपुर में अनुभवी नेताओं के हाथ संगठन की कमान सौंपी है।
जिसके नेतृत्व करने के लिए वर्षों से पार्टी के लिए समर्पित कर्मठ देशराज शर्मा को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। जबकि सबसे ज्यादा डैमेज वाले क्षेत्र बड़सर में युवा चेहरे
यशवीर पटियाल को कमान सौंपी गई है। इसी कड़ी में दशकों से पार्टी व संगठन के लिए समर्पित रहे
आदर्शकांत को हमीरपुर की बागडोर दी गई है। जबकि केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर व पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के गृह विधानसभा क्षेत्र सुजानपुर की कमान
प्रो. विक्रम राणा को दी गई है। इसी कड़ी में भोरंज क्षेत्र में
अशोक ठाकुर व नादौन क्षेत्र
वीरेंद्र पठानिया को बीजेपी मंडला अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी विचारकों व भीतरी सूत्रों की मानें तो पार्टी गढ़ को निजी विरोध के लिए ध्वस्त करने वाले नेता को अब एक तरह से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। जिसके चलते यशवीर पटियाल को जातीय समीकरणों व उनके मिलनसार स्वभाव व निष्ठा को देखते हुए बड़सर का अध्यक्ष बनाया गया है ताकि 2024 के चुनाव में उस नुकसान की भरपाई हो सके जो नुकसान 2022 के विधानसभा चुनावों में हुआ है। उधर बीजेपी ने सुजानपुर में विक्रम राणा के तौर पर ऐसा तुरप का पत्ता स्थापित किया है जो कि आने वाले चुनाव में निश्चित तौर पर अपनी शानदार नेतृत्व क्षमताओं का प्रदर्शन करेगा यह निश्चित है। सुजानपुर कांग्रेस में कांग्रेस से ज्यादा विधायक राजेंद्र राणा का आधार है। विक्रम के अध्यक्ष बनने से जहां इस निजी आधार में सेंध लगने की शंका बलवती हुई है वहीं दूसरी ओर बीजेपी काडर में भी नई स्फूर्ति का संचार हुआ है। भोरंज क्षेत्र के मंडलाध्यक्ष को जहां बीजेपी की आपसी फूट से निपटने की चुनौती रहेगी वहीं कांग्रेस के बढ़े जनाधार से भी निपटना होगा जबकि नादौन क्षेत्र में जातीय समीकरणों के चलते वीरेंद्र पठानिया को अध्यक्ष बनाया गया है। अब देखना यह है कि वीरेंद्र पठानिया मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के विधानसभा क्षेत्र में खुद को किस तरह साबित करते हैं।