24 जुलाई आधी रात को जबरन कब्जे के लिए हुआ था हमला
गाडिय़ों में भर कर आए थे हमलावर
हमला स्थल पर पुलिस पेट्रोलिंग के पहुंचने पर भागे हमलावरों की छूटी थी गाड़ी
आवाज हिमाचल। हमीरपुर
आखिर 5 दिन की जद्दोजहद व परेशानी के बाद दियोटसिद्ध हमला मामले में एफआईआर दर्ज होने का रास्ता न्यायालय के माध्यम से मिल गया है। क्रिमिनल मिसलेनियस एप्लीकेशन नंबर 373/223 के तहत ज्यूडिशियल मेजिस्ट्रेट फस्र्ट क्लास मनु प्रियंजा की अदालत ने प्रथम दृष्टया साक्ष्यों व पुलिस को 25, 26, 27 जुलाई तक लगातार दी गई शिकायतों के आधार पर पीडि़त व प्रभावित पक्ष की एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी किया है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में बड़सर पुलिस की भूमिका लगातार संदेह के घेरे में रही है। क्योंकि पीडि़त-प्रभावित पक्ष द्वारा बार-बार बड़सर पुलिस से निवेदन व आवेदन करने के बावजूद बड़सर पुलिस इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए लगातार टालमटोल करती आ रही थी। जबकि प्रभावित पक्ष की ओर से तमाम पुलिस के अधिकारियों व पदाधिकारियों को ऑनलाइन व स्पीड पोस्ट से शिकायत दर्ज करवाई गई थी। बावजूद इसके बड़सर पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की जिस कारण से पीडि़त पक्ष न्यायालय की शरण में गया। जिस पर ज्यूडिशियल मेजिस्ट्रेट फस्र्ट क्लास मनु प्रियंजा ने प्रथम दृष्टया साक्ष्यों की जांच करके एसएचओ बड़सर को एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। आदेशों की प्रति पीडि़त पक्ष के अधिवक्ता के माध्यम से बड़सर थाना को रिसीव करवाई गई है। न्यायालय द्वारा दियोटसिद्ध हमला मामले में एफआईआर दर्ज करने के बाद बड़सर पुलिस की कारगुजारी शक और संदेह के कटघरे में है कि आखिर ऐसे कौन से दखल और दबाव रहे होंगे जिनके कारण पुलिस इस मामले में पांच दिनों तक एफआईआर दर्ज करने के मामले को लगातार टरकाती व सरकाती रही।
पुलिस की ऐसी कारगुजारी के कारण आम जन का पुलिस की कार्यप्रणाली से भरोसा उठाना स्वाभाविक है। पुलिस ने इस गम्भीर व संगीन मामले पर इस कदर अंसवेदनशीलता दिखाई कि उन्होंने एक पक्ष के बार-बार के आवेदन के बावजूद एफआईआर करना उचित नहीं समझा। जिस पर पुलिस की लापरवाही से कूपित पीडि़त पक्ष ने न्यायालय की शरण ली और तब कहीं जाकर न्यायालय ने अब एसएचओ बड़सर को शिकायतकर्ताओं की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। अब इस मामले में पहले से वारदात के दौरान भाग निकले हमलावरों की गाड़ी व उसके बीच पड़ी सामग्री भी इस मामले की सबूत बनेगी।
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उधर एसएचओ बड़सर प्रवीण राणा ने न्यायालय के आदेश रिसीव होने पर साफ मुकरते हुए कहा है कि उन्हें इस तरह के कोई आदेश नहीं मिले हैं और इस मामले पर वह कुछ नहीं कहेंगे। जबकि पीडि़त पक्ष के अधिवक्ता ने न्यायालय के आदेश बड़सर थाना में आदमी भेजकर रिसीव करवाने की पुष्टि की है।






