हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में नहीं मिल रही दवाइयां
दवाईयां न मिलने के कारण इलाज हो रहा प्रभावित
व्यवस्था की अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार लोग सरकारी खौफ से हैं बेखौफ
आवाज हिमाचल। ब्यूरो हमीरपुर
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह के जिला ड्रीम प्रोजेक्ट डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर की व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। सरकार बदली, अधिकारी बदले, मेडिकल कॉलेज के मुखिया बदले लेकिन हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में मरीजों के इलाज की व्यवस्था दिन-ब-दिन बद से बदतर होती जा रही है। लम्बे अरसे से मेडिकल कॉलेज के सरकारी स्टोर में जीवन रक्षक दवाईयों का लगातार टोटा चल रहा है। लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन व प्रबंधन ने सरकारी खरीद का टेंडर लगाने की बजाय पेशेंट-टू-पेशेंट रिटेल शॉप से दवाई खरीदने का इंतजाम करके स्वास्थ्य विभाग की ओर से मिलने वाले सरकारी बजट को कारोबार का जरिया बना डाला है। जानकार बताते हैं कि मेडिकल कॉलेज आपसी सांठ-गांठ से इस कारोबार को इसलिए बढ़ावा मिला है। क्योंकि इस एवज में रिटेल कारोबारी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के हितों के पोषक बने हुए हैं। करीब 6 महीनों से मेडिकल कॉलेज के सरकारी स्टोर में दवाओं का टोटा बना हुआ है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन की सुनें तो दवाईयों की सरकारी खरीद के लिए जल्दी ही टेंडर किया जा रहा है। लेकिन यह जल्दी पिछले 6 महीनों से जल्दी में बदलने का नाम नहीं ले रही है और व्यवस्था अपने ही ढर्रे पर चली हुई है। सरकारी दवाईयों के स्टोर में दवाईयों के टोटे के कारण जहां मरीजों का इलाज लगातार प्रभावित हो रहा है वहीं आम जनता महंगे दामों पर दवाईयां बाहर से खरीदने के लिए मजबूर है। जानकारी के मुताबिक नॉर्मल सलाईन, सक्शन सेट, स्किन स्टेपलर, बी कॉम्प्लेक्स कैप्सूल, डिक्लोफिनेक गोलियां, एक्लोफिनेक गोलियां, सर्जिकल ब्लेड, अमिनो एसिड आई वी, कॉर्ड क्लैम्प, कॉट्री पेंसिल, सर्जिक्ल स्टचर्स आदि दर्जनों जरुरी दवाईयों का टोटा लगातार बना हुआ है। यहां तक कि जीवन रक्षक दवाईयों के साथ आपात स्थिति में गर्भवती महिलाओं के लिए डिलीवरी के समय प्रयोग होने वाले उपकरण भी सरकारी स्टोर में मौजूद नहीं है और इन उपकरणों को पेशेंट-टू-पेशेंट पर्ची बनाकर रिटेल शॉप से खरीदा जा रहा है। जाहिर तौर पर साफ है कि सरकारी होल सेल खरीद पर दो करोड़ दवाईयों का लाभ अगर 100 मरीजों को मिल रहा है तो रिटेल दामों पर 50 मरीजों पर ही यह बजट होम हो जाता है। जिसको लेकर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन सवालों के कटघरे में खड़ा है। लेकिन व्यवस्था टस से मस होने का नाम नहीं ले रही है।
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व्यवस्था की इस अव्यवस्था पर पक्ष जानने के लिए जब मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल रमेश भारती से इस मामले का पक्ष जानना चाहा तो बार-बार के फोन के बाद उन्होंने फोन नहीं उठाया। जब उनके लैंड लाईन पर फोन किया गया तो उनके पीए ने बताया कि साहब अभी व्यस्त हैं और यह उनकी व्यस्तता दिन भर चलने के कारण उनका पक्ष नहीं आ पाया।
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सरकारी दवाईयों की खरीद के लिए टेंडर जल्द किया जा रहा है।
डॉ. अनिल वर्मा, एमएस मेडिकल कॉलेज हमीरपुर।
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यह मामला आरकेएस से जुड़ा है। जिस पर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ही बता सकते हैं। चूंकि यह मामला उनके अंडर आता है।
विक्रम महाजन, एडिशनल डायरेक्टर मेडिकल कॉलेज हमीरपुर।
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मामला आम जन से जुड़ा है। इस मामले की जांच की जाएगी।
हेमराज बैरवा, डीसी हमीरपुर।






