कब कौन किसको टक्कर मार जाए कहा नहीं जा सकता
दशकों से बनी है यह बदहाल सूरत
उच्च न्यायालय के आदेशों पर भी प्रशासन ने नहीं किया गौर
आवाज हिमाचल । ब्यूरो हमीरपुर
हमीरपुर शहर की सबसे पुरानी सड़क द मॉल पैदल राहगीरों के लिए आफत बनी हुई है। शहर की इस सड़क पर इतने ही एक्सीडेंट हो चुके हैं। कितने पैदल राहगीर अपने हाथ-पांव तुडवा चुके हैं। कितने बुजुर्ग और महिलाओं को यहां बाइकर व दूसरी गाड़ियों वाले टक्कर मार चुके हैं। इसका अधिकारिक रिकॉर्ड पुलिस के पास मौजूद हैं। जबकि सैकड़ों मामले ऐसे हैं जो रिपोर्ट ही नहीं हुए हैं। विडंबना यह है कि यह बदहाल स्थिति अभी नहीं बनी है। दशकों से शहर की इस सड़क पर पैदल राहगीरों के लिए चलना हर दम खौफ का सबब बना हुआ है। अगर यह कहें कि मौत के साये में खौफजदा मुसाफिर इस सड़क पर साथ-साथ सफर करते हैं तो गलत नहीं होगा। कई सरकारें आई और गई। कई अधिकारी आए-गए लेकिन इस समस्या का कोई हल नहीं दे पाया। चुनावी दौर में हर पार्टी ने शहर की सड़क को पैदल चलने वालों व खरीददारों के लिए द मॉल घोषित करने के वायदे आम जनता के लिए किए लेकिन हर चुनाव जीतने के बाद इस अहम वायदे के साथ हुक्मरानों ने रह-रह कर वायदा खिलाफी की। जहां तक सिस्टम और प्रशासन का सवाल है, कई अधिकारियों ने सुर्खियां बटोरने के लिए द मॉल बनाने की मुहिम छेड़ी लेकिन अधिकारियों के तबादले के बाद नए अधिकारियों ने इस प्रयास को ठण्डे बस्ते में दबा दिया। हमीरपुर शहर की तत्कालीन सीनियर सिटीजन काउंसिल के कई बुजुर्ग अधिकारियों ने वर्ष 2012 से 2017 तक शहर की सड़क को द मॉल घोषित करवाने के लिए अथाह व अथक प्रयास किए लेकिन सिस्टम के कान पर जूं न रेंगी। यहां तक कि कुछ लोगों ने इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय में भी दस्तक दी, जिस पर उच्च न्यायालय ने प्रशासन को जनहित में इस मामले पर गौर करने के आदेश भी दिए हैं। उसके बाद वर्ष 2017 से 2022 तक सीनियर सिटीजन काउंसिल के तत्कालीन अध्यक्ष ज्ञान चंद शर्मा व उनकी सहयोगी बुजुर्ग टोली के कमजारे तलवे डीसी हमीरपुर के दरबार में मिन्नतें कर-कर के घिस गए। कई ज्ञापन दिए गए। कई बार मौखिक निवेदन किए गए। सड़क पर हादसों का हवाला दिया गया। लेकिन स्थिति जस की तस रही । माना यह जाता है कि शहर के कुछ स्वार्थी धन कुबेरों के दबाव व चालबाजियों में शहर की सड़क द मॉल घोषित नहीं हो पाई। प्रशासन से हुई तमाम बैठकों में शहर के मुख्य प्रभावशाली व्यापारी व व्यापार मंडल के अधिकारी शहर की सड़क को द मॉल घोषत करने की हामी प्रशासन के समक्ष भरते रहे लेकिन बाद में शहर के लोगों को भी बरगलाते रहे और अब आलम यह है कि शहर की सड़क पर कब कोई वाहन किसी बुजुर्ग महिला या बच्चे को टक्कर मार जाए कहा नहीं जा सकता है। आम शहरियों का कहना है कि शहर की सड़क को शिमला की तर्ज पर द मॉल घोषित करके पैदल राहगीरों के लिए सुरक्षित बनाएं।
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नागरिकों की सुरक्षा व जनहित के कार्यों के लिए सरकार व प्रशासन वचनबद्ध है। अगर शहरी जनता की ओर से शहर की सड़क को द मॉल घोषित करने का आवेदन आता है तो प्रशासन इस पर जरूर गौर करेगा।
मनीष सोनी, एसडीएम हमीरपुर |






