April 10, 2026 4:14 AM

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शहीद नायब सूबेदार प्रवीण कुमार का राजकीय सम्मान के साथ हुआ अन्तिम संस्कार

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सेना के जवानों ने सैन्य सम्मान के साथ अपने साथी को दी विदाई, बेटे आयुष ने पिता को दी मुख्यगनी

शहीद अपने पीछे छोड़ गया बूढ़े माँ – बाप, पत्नी व दो बच्चे,
सैंकड़ो लोगों ने नम आँखों से शहीद को दी अन्तिम विदाई!

आवाज हिमाचल। हमीरपुर

बड़सर विधानसभा के बड़ाग्राम पंचायत के शहीद नायब सूबेदार प्रवीण कुमार का शनिवार को उनके पैतृक श्मशाघाट पर राजकीय सम्मान के साथ अन्तिम संस्कार कर दिया गया! शहीद प्रवीण कुमार की अन्तिम यात्रा में प्रशाशन के अधिकारीयों सहित सैंकड़ो लोगों ने नम आँखों से अन्तिम विदाई दी! बेटे आयुष ने अपने पिता को मुख्यगनी दी! वहीं भारतीय सेना की तरफ से शहीद को श्रद्धांजलि देने पंहुची सैनिकों की टुकड़ी ने अपने साथी को सैन्या सम्मान के साथ सलामी देते हुए अन्तिम रस्म अदा की!

दीगर है कि शुक्रवार को बड़ाग्राम पंचायत के शहीद नायव सुवेदार प्रवीण कुमार ने करीब 5 माह की लम्बी बीमारी की लड़ाई के बाद शहादत पाई थी! शहीद प्रवीण कुमार शरहद पर देश की सेवा करते कभी किसी लड़ाई में पीछे नहीं हटे लेकिन दिल्ली के आर्मी अस्पताल में अपनी जिन्दगी की जंग हार गए! शहीद नायव सूबेदार प्रवीण कुमार अपने पीछे बूढ़े माँ – बाप पत्नी, एक बेटा व बेटी छोड़ गए है! बतादे कि जैसे ही शहीद प्रवीण की पार्थिव देह बड़ाग्राम पंहुची तो तो उन्के अन्तिम दर्शनों के लिए सैंकड़ो लोगों का हजूम उमड़ पड़ा, ज़ब शहीद के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गाँव ले जाया गया तो माता पिता अपने बेटे को तिरंगे में लिपटा देख बेसुध हो गए! उन्हें अभी तक ये समझ नहीं आ रहा था कि उनके बेटे को तिरंगे में क्यों लाया गया है क्यूंकि माता पिता को उनके शहीद होने की जानकारी नहीं दी गई थी!

क्षेत्र की गवाल्ड खड़ड़ में उनका अन्तिम संस्कार किया गया इससे पहले सेना की तरफ से पंहुचे आला अधिकारीयों को शहीद की बर्दी व तिरंगा उनके पिता अंमीचंद को सौंते हुए कहा कि शहीद प्रवीण कुमार एक बहादुर सिपाही थे जिन्होंने सेना में ड्यूटी देते हुए अपने कर्तव्य से कभी कदम पीछे नहीं हटाये, भारतीय सेना उनके साहस व जज्बे को सलाम करती है और देश के लिए दिए गए उनके अतुल्य बलिदान को हमेशा याद रखेगी!
बॉक्स
विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने शहीद के पैतृक श्मशाघाट पर पंहुचकर उन्हें नम आँखों से श्रद्धांजलि अर्पित की! शहीद के पिता व बेटे से मिलकर उन्होंने इस दुःख की घड़ी में उन्हें ढांढस बंधबाया! वहीं बड़सर प्रशासन के अलाधिकारीयों ने भी शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की!

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